Friday, 24 September 2010

बस आज मिलें.....

चाहता हूँ की इन हसरतो को पंख आज मिले...
जो भी गुनगुनाऊ बन जाये संगीत,
ऐसा कोई साज मिले....
चुभने लगी है ये खामोशियाँ,
इन खामोशियों को अब तो आवाज मिलें.....
होता नहीं इन्तजार अब,
बस ये सब आज मिलें, आज मिलें....

2 comments:

  1. होता नहीं इन्तजार अब,
    बस ये सब आज मिलें, आज मिलें....
    यही तो इस कमबख्त दिल की मुसीबत है की बस आज मिले अभी मिले ...अच्छी लगी पंक्तियाँ

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