Tuesday, 28 December 2010

!!!न्यू इयर Resolution!!!


लो जी...एक और साल जो पिछले साल नया था पर इस बार फिर से पुराना होकर खत्म होने को है...क्या नया किया पिछले साल????...हम्ममम्मम्म.....कुछ नहीं...वही किया जो पिछले काफी सालो से करता आ रहा था...कुछ नया करने का प्रण...और कुछ भी नया ना करके साल का खात्मा...पर इस बार सोच ही लिया...कुछ भी हो उन सब resolution पर जरुर अमल जरुर करूँगा जिन्हें साल शुरू होने से पहले पेपर पर उतारता जरुर था पर "कल से","कल से" पर छोड़ छोड़ कर उन्हें पूरी ना करने का resolution जरुर पूरी इमानदारी से पूरा करता था...पर अब और नहीं...इस सन्डे को ही सफाई करते वक़्त वो लिस्ट हाथ आ ही गई...जिसे पिछली साल बड़ी मासूमियत और ईमानदारी से तैयार किया था...पर एक भी पूरी ना करके भी अपनी ईमानदारी का पूरा परिचय दिया..पर इस बार लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट कर दिया है...कमर कस ली है...चाहे कुछ भी हो, कितने भी नए घोटाले, कितने भी बोम्ब विस्फोट, कितनी बार भी दिल टूटे, कितनी बार उधारी वाले आकर हाथ साफ़ कर जाए पर जो जो ये resolution बना रहा हूँ, में राखी सावंत और डोल्ली बिंद्रा की कसम खाकर प्रण लेता हूँ की इस साल इन्हें जरुर पूरा करूँगा...
१. नो मोर स्मोकिंग*..(*Terms and conditions apply)
२. नो मोर ड्रिंकिंग*....(*Terms and conditions apply)
३. किसी भी लड़की की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखूंगा, एक आध आंख अगर बंद हो जाये लड़की देखकर तो उसकी छुट मिलेगी शक के आधार पर,
४. कोई भी काम पेंडिंग नहीं,
५. बहुप्रतिषित "रोज जिम जाना, तंदुरस्ती लाना" योजना इस बार पक्का १ तारीख से शुरू,
६. रोज कुछ नया और सार्थक लिखने और पढने की पूरी कोशिश करूँगा (कोशिश करूँगा)
७. फ्लर्टिंग के कारण पिछले सालो में जो भी आर्थिक, शारीरिक और मानसिक नुक्सान हुआ है...उसे इस साल पूर्ण रूप से अवोइड करूँगा...
८. अपने ब्लॉग पर पूरी तरह से मेहनत करूँगा और शायरी का स्तर अनु मालिक से बढाकर नवजोत सिंह सिधु तक ले जाना का प्रयास करूँगा,
९. अच्छा टिपण्णी बाज बनने की कोशिश की थी इस साल पर फ्लॉप रहा पर अगले साल से पक्का एक अच्छा टिपण्णी बाज बनने की कोशिश करूँगा...
१०. ऑफिस में ऑफिस से हटकर अनर्गल काम करके ऑफिस का जो नुक्सान किया है, उसकी भरपाई इस साल में करने की पूरी कोशिश करूँगा (हेहेहेहेहेहे)
११. नियमित रूप से प्रार्थना निस्वार्थ भाव से, सिर्फ देश की खुशहाली के लिए..गीत सार को जीवन में उतारने की पूरी तैयारी ताकि मन मारने के उपाय सीख सकू. ;-)
१२. और सबसे बड़ा resolution की अब असत्य का पूर्णरूप से त्याग...और सिर्फ सत्य या सच दोनों में से कोई availble हो उसका साथ....
प्रण तो और भी बहुत से थे जो लेने थे...पर सोचा की नीरसता को और ना बढाया जाए...वर्ना साल अच्छा शुरू होने से पहले ही ख़राब हो जायेगा...सो इन्ही कुछ अच्छे प्रणों के साथ तैयारी करूंगा नए साल की....खेर मेरी पोस्ट तो वैसे भी कोई पढता नहीं फिर भी नए साल की शुभकामनाये...अंत में एक बाल कविता अनु मालिक जी की प्रेरणा से...:
~~~लो जी आया फिर नया साल~~~~
~~~कुछ नया हो इस बार हमारा हाल~~~
~~~हो एक आध gf और ढेर सारा माल~~
~~~मिले ढेर सारे लह लहलहाते बाल (बाल कविता है)~~~
~~~जीवन में बनी रही सबके लय और ताल~~~
~~~मुबारक हो सबको नया साल~~~~

Friday, 24 September 2010

बस आज मिलें.....

चाहता हूँ की इन हसरतो को पंख आज मिले...
जो भी गुनगुनाऊ बन जाये संगीत,
ऐसा कोई साज मिले....
चुभने लगी है ये खामोशियाँ,
इन खामोशियों को अब तो आवाज मिलें.....
होता नहीं इन्तजार अब,
बस ये सब आज मिलें, आज मिलें....

Monday, 6 September 2010

अपडेट होती ख्वाहिशे....


ख्वाहिशो की फेहरिस्त में से,
कुछ एक को कल ही डिलीट मारा है....

जब उसने कॉल करके कहा की,
में उसे भूल जाऊं,
क्योकि उसकी शादी कही और फिक्स हो गई है.....


जब घर से खबर आई,
की अपनी नई Bike का विचार निकाल दूँ ,
क्योकिं घर पर पैसो की जरूरत है अभी,

जब बॉस ने बुलाकर कहा की,
कंपनी की condition खराब है,
इसलिए prmotion और इन्क्रीमेंट अगले साल,

जब बैंक वालो ने फ़ोन करके बताया की,
आईटी return फाइल कमजोर होने के कारण,
होम लोन पास नहीं होगा,

जब डॉक्टर ने बताया की,
condition क्रिटिकल है,
यह बाल वापस नहीं आयेंगे...

पता नहीं ऐसी कितनी ही ख्वाहिशे रोज डिलीट करनी पड़ती है...
पर फिर भी रोज नई जुडती जाती है....
बस रिफ्रेश होकर...नए नाम के साथ अपडेट होकर.....
शायद इसी का नाम जिन्दगी है......

Saturday, 21 August 2010

A call from the hell.....

Date

News

28-Dec-08

पाकिस्तान में धमाका, 23 की मौत

28-May-09

फिर दहला पाकिस्तान, पेशावर में धमाके

14-Jun-09

9 पाकिस्तान में धमाका, आठ की मौत

08-Dec-09

Pakistan Bomb Blast, Lahore Bomb Explosion

08-Jan-10

Pakistan: Six killed in Karachi blast(8 Jan 2010)

22-Feb-10

10 killed in Pakistan suicide bomb blast

16-Apr-10

Bomb blast hits Pakistan hospital in Quetta

15-Jul-10

Bus stop suicide bomb in Pakistan's Swat kills five

१५ जुलाई की घटना के बाद भारतीय सेना ने एक अजीब सी कॉल ट्रेश की जो पाकिस्तान के कराची शहर में किसी मिया कुरैशी को की गई थी..यह अजीब इसलिए थी क्योकि कॉल किसको की गई थी यह तो पता चला रहा था पर कहाँ से की गई थी, इसका पता लगाने में सब असमर्थ थे....सिर्फ यह पता चल रहा था की जो नेटवर्क एरिया पता चल रहा है, वो पाकिस्तान से मिलता जुलता ही है, पर पाकिस्तान नहीं है....चलिए आपको दिखाते है की कॉल में आखिर बात क्या हुई थी, मिया कुरैशी और उस अजनबी के बीच.......

अजनबी (१)- हेलू..हेलू..हेलउ....हां कौन कुरैशी चाचा बोल रहे है ?

कुरैशी चाचा (२) : हां जी बोल रिया हूँ , कौन फरमा रिया है?

चाचा पहचाना नहीं...मरदूद पाकिस्तानी बोल रिया हूँ

कौन मरदूद ??...अरे पाकिस्तान में मरदूदो की कमी है क्या, यहाँ तो थोक के भाव भरे पड़े है मरदूद, तुम कौनसे वाले मरदूद हो मिया ?

अरे चाचा में मरदूद स्वात वाला, आपकी फूफी का भाई, पहचाना

मजाक मत करो बेटा...वो बेचारा तो पिछले महिने ही सब्जी मंडी में प्याज खरीदते वक्त हुई भगदड में मर गया था, हुकुमराणे तो बहुत मजाक उड़ाती ही है इस तरह मारे जाने वालो पर, कम से कम तुम मत उड़ाओ

अरे चाचा, में ही हूँ, में इस वक्त नरक से बोल रहा हूँ

नरक से ?? पर यह फोन की सुविधा वहां कब से शुरू हो गई

चाचा, सुविधा तो यहाँ पाकिस्तान में शुरू होने से पहले ही हो गई थी, पर भ्रष्टाचार की शुरुआत यहाँ ताज़ी ताज़ी ही हुई है, इस मामले में जरुर वो हमारे देश से पीछे रह गए..... पहले फोन लगाने की सख्त मनाही थी पर अब थोडा बहुत हथेली गरम करने पर फोन लगाने को मिल जाता है..

अरे वाह बेटा, यह काम तो बहुत अच्छा किया दोजख वालो ने...कम से कम रिश्वत लेकर भी कुछ सुविधा तो देते है...यहाँ पर तो वो वाली बात भी नहीं है..बड़ा दुःख हुआ बेटा तुम्हारी मौत की खबर सुनकर, पर फिर भी शुक्र है की बमों से छलनी छलनी होकर मरने की बजाय लोगो के पावो के नीचे आकर ही दम तोडा...यह तो पूर्वजन्मो के अछे कर्मो का नतीजा है, वर्ना यहाँ हर एक को इतनी अच्छी मौत कहा नसीब

सही कह रहे हो चाचा, वाकई में यहाँ आकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है, यह सब हमारी सरजमीं का ही असर है की वो पहले से ही इतना कुछ महसूस करा देती है की यहाँ आकार तो बिलकुल घर जैसा वातावरण मिलता है, और कुछ कुछ बातों में तो घर से भी अच्छा...में तो कहता हूँ की आप भी यही आ जाओ, वहाँ रहकर क्यों दुःख भोग रहे हो..”

अरे बेटा, कोशिश तो में भी यही कर रहा हूँ की अब इस मुल्क को छोडकर कही और चला जाऊ...पर क्या करू, कम्ब्ख्वत मौत बी नसीब नहीं हो रही इन दिनों तो....सब्जी मंडी जाता हू तो वो कम्ब्खत मस्जिद में बम फोड देते है, मस्जिद में जाऊं तो बाजार में...पता नहीं इन लोगो की मुझसे ही क्या दुश्मनी है, जहा में जाता हू वहाँ कुछ करते ही नहीं..अब तुम ही बताओ की कैसे नसीब हो मुझे मौत

सच में चाचा, यह तो बहुत ज्यादती हो रही है आपके साथ, पर अब अल्लाह की यही मंर्जी है तो कर भी क्या सकते है..आपको शायद जिन्दा रहकर ही दोजख भोगना लिखा हुआ है

सही है बेटा....और बताओ वहां सब कैसे चल रहा है ?

यहाँ सब अच्छा है, अपने सारे भाई बंधू और रिश्तेदार भी यही पर है तो अकेलापन भी महसूस नहीं होता...जिन्दा रहते हुए तो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती थी अपने मुल्क, पर यहाँ वो आराम से नसीब हो जाती है...और अपने मुल्क्वासियो को तो यहाँ विशेष सुविधाए भी दे रखी है...हमारे सारे महान नेता भी यही है जो समय समय पर हक के लिए आवाज उठाते रहते है....अब तो एक अलग से कम्युनिटी भी बना दी गई....यहाँ पर आराम से भीड़ में घूम भी सकते है, यह डर जो नहीं रहता की कब विस्फोट हो जाये...क्योकि यहाँ अगर ऐसा हो गया तो फिर तो हम पाकिस्तानियों को मरने पर भी जगह् नही मिलेगी...इसी डर से हमारे सारे र भाई चुप बैठे है..वर्ना खुराफात तो अभी भी चलती रहती है उनके दिमाग में.....यहाँ ना तंग गलियों में घुटती साँसे है और नाही उन सरकारों का डर है जो बेवजह खून चुसती रहे.... भ्रष्टाचार है पर बहुत ही आरंभिक दौर में...वो भी हमारे और हिंदुस्तानियों की वजह से....

२. अच्छा, ये हिन्दुस्तानी भी वही पर है?

और नहीं तो क्या...है तो हमारे भाई ही...इन्हें कौनसा स्वर्ग नसीब हो जायेगा...इनके सारे नेता भी यही भरे पड़े है...और मजे की बात तो यह है की यहाँ आकार भी दोनों मुल्को के वो नेता जो जिन्दा थे तब भी कश्मीर के नाम की राजनीती सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए करते थे, वो यहाँ आकार भी इसी राग को गाये जा रहे है...अब आप ही सोचो जब उस समय भी इन्होने धरती के स्वर्ग की चिंता नहीं की तो अब भला इन्हें मरने पर स्वर्ग कैसे नसीब हो सकता है

सही कह रहे हो बेटा....इस कश्मीर के पीछे जिन्हें दुनिया स्वर्ग कहती है न जाने कितने लोग नरक के हवाले होने, जीते जी भी और मरने के बाद भी.....पर यह भी सत्य है इसी के पीछे ही तो हमारे नौजवानो को जीविका की ज्यादा परवाह नहीं करनी पड़ती...हमारे हुकुमरानो ने ऐसी बहुत सी छुपी हुई कम्पनिया खोल रखी है जो इन्हें मौत की कीमत पर जिन्दा रहने के लिए रोटी का जुगाड जरुर करवा देती है...चलो छोडो बेटा यहाँ की..मतलब वहाँ पर पूरा आराम ही है...

हां चाचा, रोज के अस्सी कोडे जरूर खाने पड़ते है नरक आने की सजा के तौर पर, पर बाकि सब ठीक है...पूछा भी था की यह किसलिए.....तो जवाब मिला की तुमने जो बुरे करम कि ये उसी की सजा है यह...हमने कहा भी की हम तो पांच वक्त के नमाजी थे और जब तक जिन्दा रहे किसी को परेशां भी नहीं किया फिर हमारे करम बुरे कैसे हो गए...उनका कहना था की जिस मुल्क में जन्म लिया वह पैदा होकर ही तुमने अपने सारे करम बिगाड लिए थे की और किन्ही बुरे कर्मो की जरुरत ही नहीं है....अब तुम ही बताओ चाचा की माना की हमने पाकिस्तान में जन्म लेकर अपने करम बिगाड़े, इसलिए नरक मिला पर पिछले जन्म में भला क्या बुरा किया था जिसकी सजा उस मुल्क में पैदा करके अल्लाह ने दी...खेर अब कोई शिकायत नहीं..इसलिए अलावा तो कह सकते है की everything is right here

अरे वाह बेटा...पाकिस्तानी होकर इंग्लिश बोलना सीख लिया..यह कैसे हुआ भला?

अरे चाचा वो साले सारे हरामी अमेरिकी भी यही है जो अफगानिस्तान में हमारे भाइयो को मारने गए थे..अब खुद ही नरक भुगत रहे है...बस उन्ही से सीख लिया थोडा बहुत

अच्छा है बेटा..मरने के बाद तो आखिर कुछ सिखने को मिला...वैसे बेटा आज तुम्हे मेरी याद कैसे आ गई...जिन्दा थे तब तो याद भी नहीं करते थे?

अरे हां चाचा, मैंने आपको फोन किया था यह बताने को की आपकी फूफी और जो बाकि रिश्तेदार थे वो भी आज जो स्वात में बम फटा था, उसमे मरकर यहाँ आ गए...तो फूफी ने ही कहा की तुम्हे इत्तिल्ला दे दू कही आपकी उनसे बात न होने पर परेशान ना हो जाओ, इसलिए...

अरे नहीं बेटा...वो भी चले गए मुझे छोडकर..अब भला में अकेला क्या करूँगा इस मुल्क में रहकर...कोशिश करता हू की में भी जल्द ही वहाँ आ जाऊ..खेर अब तुम्हारा बिल बहुत आ गया होंगा?

नहीं वैसा नहीं है....बाकि सारी दुनिया में फोन करने पर तो STD चार्ज लगता है पर अपने मुल्क की कॉल लोकल मानी जाती है....इसलिए ज्यादा पैसा नहीं लगता..आज कम से कम इस बात पर फक्र किया ही जा सकता है, पाकिस्तान में पैदा होने का....चलिए चाचा अब फोन रखता हू, यहाँ काफी लंबी लाइन लगी है...आप अपना ध्यान रखियेगा और कोशिश कीजिये की जल्द से जल्द यहाँ पहुँच सके...सभी आपकी प्रतीक्षा में है

में पूरी कोशिश करूँगा बेटा...आज से बाजारों और मस्जिदों के ज्यादा चक्कर लगाऊंगा..क्या पता मेरी किस्मत भी खुल जाए...

Monday, 9 August 2010

एक मार्मिक व्यथा...सुखद अंत के साथ.....


एक गंजे की व्यथा कुछ मार्मिक संवादों के माध्यम से.......

१. एक गंजा बड़ा भाई जो की स्मगलर है, अपने छोटे भाई जिसके पास बड़े बड़े लहराते बाल है को कहता है “हईई आज मेरे पास गाडी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है, तुम्हारे पास क्या है..”...छोटा भाई कमीनी मुस्कान के साथ कहता है “भाईइइइ .....मेरे पास पास बाल है “....बड़ा भाई यह जवाब सहन नहीं कर पाता और आत्महत्या कर लेता है ....

२. एक प्रेमी (जिसके सर पर बहुत कम बाल रह गए थे ) अपनी माशुका से इश्क फरमाते हुए कहता है “ डार्लिंग तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की में तुम्हे प्यार नहीं करता, आज में कसम खाकर कहता हूँ की जब तक मेरे सर पर अंतिम बाल मौजूद है, में तुम्हे इसी तरह प्यार करता रहूँगा”....प्रेमिका एक नजर उसके सर पर डालती है और कहती है “मुझे लगता है की अब मुझे नया प्रेमी देख लेना चाइये,क्योकि तुम तो ज्यादा दिन तक साथ नहीं निभा पाओगे..”

३. “आखिर दिया ही क्या है पिताजी आपने सिवाय इस hereditary की बीमारी के...क्या कसूर था आखिर मेरा, जो मुझे यह मिली (सर पर हाथ लगाकर सुबुकते हुए)...आज कोई भी लड़की मेरे सामने देखने तक को तैयार नहीं.....जब आपको पता ही था की यह सबको विरासत में मिल रही है तो फिर मुझे पैदा करने की जरुरत ही क्या थी....बताइए पिताजी बताइए, आज आप यु चुप नहीं रह सकते (पुन: सुबकते हुए)”...

४. “आज खुश तो बहुत होंगे तुम, हईईइइइ... की आज विजय दीनानाथ चौहान तुम्हारी चोखट पर खड़ा है, वो इंसान जिसने आज तक तुम्हारा नाम तक नही लिया, यही सोच कर तुमने मेरे बालो अत्याचार करने शुरू कर दिया की अब तो इसे मेरी दर पर आना ही पड़ेगा..है ना यही सोचकर तुमने इनको मेरे से छिनना शुरू कर दिया...अब तो बहुत खुश होंगे तुम..हईईई ई....तो लो आज में तुम्हारे दर पर खड़ा हू...अब करो इन्साफ..लौटा दो मुझे मेरे वो बाल, जिन पर मुझे नाज था..”

५. “नहीं माँ नहीं ...मत रुको मुझे..आह्हहह.......क्या करूँगा में अब रूककर..आह्ह्ह्ह्ह...जिसे देखो वो मेरे नाम की हंसी हँसे जा रहा है...जो समझदार है वो मुह फेर कर हसते है और जो नासमझ है वो मुह पर....अब तुम ही बताओ माँ कैसे सहू में यह जिल्लत भरी जिंदगी....आखिर कसूर क्या था मेरा...यही की मेरे बाल नहीं है....इसमें मेरी क्या गलती माँ, क्या गलती....पर माँ में वचन देता हू की अगले जनम में भी में तेरे कोख से ही जनम लूँगा, पर तू ध्यान रखना और बचपन से ही मेरे बालो का स्पेशल ध्यान रखना, ताकि यह नौबत फिर से ना आये...आह्ह्ह्ह्ह..में जा रहा हू माँ...”


पर इन संवादों का अंत इतना दुखद नहीं था....कुछ भी अनर्थ होने से पहले अचानक गांधीजी प्रकट होते है (हो सकता है भाई, मुना भाई में भी हुआ था), वो अपनी निर्मल वाणी में कहते है “क्या हुआ बेटा, किस के खोने के गम में तुम मरने का विचार ला रहे हो, इनके (सर पर हाथ रखते हुए), ये इस नश्वर शरीर का ऐसा हिस्सा है, जो कुछ काम का नहीं, अगर कुछ काम का है तो वो इसके अंदर रखा हुआ दिमाग....इसलिए इनके जाने का गम न करो, मुझे ही देख लो...आज चाहे किसके कितने ही बाल क्यों ना, लेकिन वो भागता तो मेरे फोटो वाले चंद टुकडो के पीछे ही है.....इस useless body part के जाने का शोक मनाने के बजाय, उठो और कुछ ऐसा करो की लोग तुमसे बात भी करे तो नजरे झुकाकर...फिर बालो की तरफ किसी का ध्यान ही नहीं जायेगा....”...इतना कहकर गांधीजी फिर से गायब हो गए....और रह गई उनकी अनमोल बातें...दुनिया के सभी गंजो के लिए प्रेरणादायक......सुखद अंत..... :)

Saturday, 7 August 2010

Blogging ki duniya में मेरा पहला दिन....

बड़े लंबे समय से सोच रहा था की अपना ब्लॉग बनाऊ.....कमेंट्स पाने की चाहत में हसरतें परवान चढ़ रही थी और यह कीड़ा और भी प्रबल हो गया जब से यह लगने लगा की आज समझदार लोगो के संपर्क में रहने का यह सबसे उत्तम तरीका है......इसलिए ना चाहते हुए और न होते हुए भी creativity पैदा करनी पड़ रही है और साहित्य की दुकान के सामने भी ना देखने वाले इंसान को साहित्य पढ़ना पड रहा है ताकि आने वाले भविष्य में कम से कम कुछ पढ़ा हुआ ही लिख सकूँ.........खेर जानता हूँ की लिख कर तो कुछ ज्यादा नहीं दे पाउँगा ब्लॉग की दुनिया में विचरने वाले प्राणियों को....पर हां..उनके लिखे पर प्रतिक्रिया करने में जरुर आगे रहूँगा... एक अच्छा writer तो नहीं पर एक अच्छा reader बनने की कोशिश जरुर करूँगा....

इसी आशा के साथ....यह मेरी पहले छोटी सी पोस्ट................