Friday, 24 September 2010

बस आज मिलें.....

चाहता हूँ की इन हसरतो को पंख आज मिले...
जो भी गुनगुनाऊ बन जाये संगीत,
ऐसा कोई साज मिले....
चुभने लगी है ये खामोशियाँ,
इन खामोशियों को अब तो आवाज मिलें.....
होता नहीं इन्तजार अब,
बस ये सब आज मिलें, आज मिलें....

Monday, 6 September 2010

अपडेट होती ख्वाहिशे....


ख्वाहिशो की फेहरिस्त में से,
कुछ एक को कल ही डिलीट मारा है....

जब उसने कॉल करके कहा की,
में उसे भूल जाऊं,
क्योकि उसकी शादी कही और फिक्स हो गई है.....


जब घर से खबर आई,
की अपनी नई Bike का विचार निकाल दूँ ,
क्योकिं घर पर पैसो की जरूरत है अभी,

जब बॉस ने बुलाकर कहा की,
कंपनी की condition खराब है,
इसलिए prmotion और इन्क्रीमेंट अगले साल,

जब बैंक वालो ने फ़ोन करके बताया की,
आईटी return फाइल कमजोर होने के कारण,
होम लोन पास नहीं होगा,

जब डॉक्टर ने बताया की,
condition क्रिटिकल है,
यह बाल वापस नहीं आयेंगे...

पता नहीं ऐसी कितनी ही ख्वाहिशे रोज डिलीट करनी पड़ती है...
पर फिर भी रोज नई जुडती जाती है....
बस रिफ्रेश होकर...नए नाम के साथ अपडेट होकर.....
शायद इसी का नाम जिन्दगी है......