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१५ जुलाई की घटना के बाद भारतीय सेना ने एक अजीब सी कॉल ट्रेश की जो पाकिस्तान के कराची शहर में किसी मिया कुरैशी को की गई थी..यह अजीब इसलिए थी क्योकि कॉल किसको की गई थी यह तो पता चला रहा था पर कहाँ से की गई थी, इसका पता लगाने में सब असमर्थ थे....सिर्फ यह पता चल रहा था की जो नेटवर्क एरिया पता चल रहा है, वो पाकिस्तान से मिलता जुलता ही है, पर पाकिस्तान नहीं है....चलिए आपको दिखाते है की कॉल में आखिर बात क्या हुई थी, मिया कुरैशी और उस अजनबी के बीच.......
अजनबी (१)- “हेलू..हेलू..हेलउ....हां कौन कुरैशी चाचा बोल रहे है ?”
कुरैशी चाचा (२) : “हां जी बोल रिया हूँ , कौन फरमा रिया है?”
१ – “ चाचा पहचाना नहीं...मरदूद पाकिस्तानी बोल रिया हूँ “
२ – “कौन मरदूद ??...अरे पाकिस्तान में मरदूदो की कमी है क्या, यहाँ तो थोक के भाव भरे पड़े है मरदूद, तुम कौनसे वाले मरदूद हो मिया ?”
१ – “ अरे चाचा में मरदूद स्वात वाला, आपकी फूफी का भाई, पहचाना “
२ – “ मजाक मत करो बेटा...वो बेचारा तो पिछले महिने ही सब्जी मंडी में प्याज खरीदते वक्त हुई भगदड में मर गया था, हुकुमराणे तो बहुत मजाक उड़ाती ही है इस तरह मारे जाने वालो पर, कम से कम तुम मत उड़ाओ”
१ – “ अरे चाचा, में ही हूँ, में इस वक्त नरक से बोल रहा हूँ “
२ – “नरक से ?? पर यह फोन की सुविधा वहां कब से शुरू हो गई “
१ – “ चाचा, सुविधा तो यहाँ पाकिस्तान में शुरू होने से पहले ही हो गई थी, पर भ्रष्टाचार की शुरुआत यहाँ ताज़ी ताज़ी ही हुई है, इस मामले में जरुर वो हमारे देश से पीछे रह गए..... पहले फोन लगाने की सख्त मनाही थी पर अब थोडा बहुत हथेली गरम करने पर फोन लगाने को मिल जाता है..”
२ – “अरे वाह बेटा, यह काम तो बहुत अच्छा किया दोजख वालो ने...कम से कम रिश्वत लेकर भी कुछ सुविधा तो देते है...यहाँ पर तो वो वाली बात भी नहीं है..बड़ा दुःख हुआ बेटा तुम्हारी मौत की खबर सुनकर, पर फिर भी शुक्र है की बमों से छलनी छलनी होकर मरने की बजाय लोगो के पावो के नीचे आकर ही दम तोडा...यह तो पूर्वजन्मो के अछे कर्मो का नतीजा है, वर्ना यहाँ हर एक को इतनी अच्छी मौत कहा नसीब”
१ – “सही कह रहे हो चाचा, वाकई में यहाँ आकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है, यह सब हमारी सरजमीं का ही असर है की वो पहले से ही इतना कुछ महसूस करा देती है की यहाँ आकार तो बिलकुल घर जैसा वातावरण मिलता है, और कुछ कुछ बातों में तो घर से भी अच्छा...में तो कहता हूँ की आप भी यही आ जाओ, वहाँ रहकर क्यों दुःख भोग रहे हो..”
२ – “अरे बेटा, कोशिश तो में भी यही कर रहा हूँ की अब इस मुल्क को छोडकर कही और चला जाऊ...पर क्या करू, कम्ब्ख्वत मौत बी नसीब नहीं हो रही इन दिनों तो....सब्जी मंडी जाता हू तो वो कम्ब्खत मस्जिद में बम फोड देते है, मस्जिद में जाऊं तो बाजार में...पता नहीं इन लोगो की मुझसे ही क्या दुश्मनी है, जहा में जाता हू वहाँ कुछ करते ही नहीं..अब तुम ही बताओ की कैसे नसीब हो मुझे मौत”
१ – “ सच में चाचा, यह तो बहुत ज्यादती हो रही है आपके साथ, पर अब अल्लाह की यही मंर्जी है तो कर भी क्या सकते है..आपको शायद जिन्दा रहकर ही दोजख भोगना लिखा हुआ है “
२ – “ सही है बेटा....और बताओ वहां सब कैसे चल रहा है ?”
१ – “ यहाँ सब अच्छा है, अपने सारे भाई बंधू और रिश्तेदार भी यही पर है तो अकेलापन भी महसूस नहीं होता...जिन्दा रहते हुए तो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती थी अपने मुल्क, पर यहाँ वो आराम से नसीब हो जाती है...और अपने मुल्क्वासियो को तो यहाँ विशेष सुविधाए भी दे रखी है...हमारे सारे महान नेता भी यही है जो समय समय पर हक के लिए आवाज उठाते रहते है....अब तो एक अलग से कम्युनिटी भी बना दी गई....यहाँ पर आराम से भीड़ में घूम भी सकते है, यह डर जो नहीं रहता की कब विस्फोट हो जाये...क्योकि यहाँ अगर ऐसा हो गया तो फिर तो हम पाकिस्तानियों को मरने पर भी जगह् नही मिलेगी...इसी डर से हमारे सारे र भाई चुप बैठे है..वर्ना खुराफात तो अभी भी चलती रहती है उनके दिमाग में.....यहाँ ना तंग गलियों में घुटती साँसे है और नाही उन सरकारों का डर है जो बेवजह खून चुसती रहे.... भ्रष्टाचार है पर बहुत ही आरंभिक दौर में...वो भी हमारे और हिंदुस्तानियों की वजह से....”
२. – “अच्छा, ये हिन्दुस्तानी भी वही पर है?”
१ – “और नहीं तो क्या...है तो हमारे भाई ही...इन्हें कौनसा स्वर्ग नसीब हो जायेगा...इनके सारे नेता भी यही भरे पड़े है...और मजे की बात तो यह है की यहाँ आकार भी दोनों मुल्को के वो नेता जो जिन्दा थे तब भी कश्मीर के नाम की राजनीती सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए करते थे, वो यहाँ आकार भी इसी राग को गाये जा रहे है...अब आप ही सोचो जब उस समय भी इन्होने धरती के स्वर्ग की चिंता नहीं की तो अब भला इन्हें मरने पर स्वर्ग कैसे नसीब हो सकता है “
२ – “सही कह रहे हो बेटा....इस कश्मीर के पीछे जिन्हें दुनिया स्वर्ग कहती है न जाने कितने लोग नरक के हवाले होने, जीते जी भी और मरने के बाद भी.....पर यह भी सत्य है इसी के पीछे ही तो हमारे नौजवानो को जीविका की ज्यादा परवाह नहीं करनी पड़ती...हमारे हुकुमरानो ने ऐसी बहुत सी छुपी हुई कम्पनिया खोल रखी है जो इन्हें मौत की कीमत पर जिन्दा रहने के लिए रोटी का जुगाड जरुर करवा देती है...चलो छोडो बेटा यहाँ की..मतलब वहाँ पर पूरा आराम ही है...”
१ – “हां चाचा, रोज के अस्सी कोडे जरूर खाने पड़ते है नरक आने की सजा के तौर पर, पर बाकि सब ठीक है...पूछा भी था की यह किसलिए.....तो जवाब मिला की तुमने जो बुरे करम कि ये उसी की सजा है यह...हमने कहा भी की हम तो पांच वक्त के नमाजी थे और जब तक जिन्दा रहे किसी को परेशां भी नहीं किया फिर हमारे करम बुरे कैसे हो गए...उनका कहना था की जिस मुल्क में जन्म लिया वह पैदा होकर ही तुमने अपने सारे करम बिगाड लिए थे की और किन्ही बुरे कर्मो की जरुरत ही नहीं है....अब तुम ही बताओ चाचा की माना की हमने पाकिस्तान में जन्म लेकर अपने करम बिगाड़े, इसलिए नरक मिला पर पिछले जन्म में भला क्या बुरा किया था जिसकी सजा उस मुल्क में पैदा करके अल्लाह ने दी...खेर अब कोई शिकायत नहीं..इसलिए अलावा तो कह सकते है की everything is right here”
२– “अरे वाह बेटा...पाकिस्तानी होकर इंग्लिश बोलना सीख लिया..यह कैसे हुआ भला?”
१ – “अरे चाचा वो साले सारे हरामी अमेरिकी भी यही है जो अफगानिस्तान में हमारे भाइयो को मारने गए थे..अब खुद ही नरक भुगत रहे है...बस उन्ही से सीख लिया थोडा बहुत”
२ – “अच्छा है बेटा..मरने के बाद तो आखिर कुछ सिखने को मिला...वैसे बेटा आज तुम्हे मेरी याद कैसे आ गई...जिन्दा थे तब तो याद भी नहीं करते थे?”
१ – “अरे हां चाचा, मैंने आपको फोन किया था यह बताने को की आपकी फूफी और जो बाकि रिश्तेदार थे वो भी आज जो स्वात में बम फटा था, उसमे मरकर यहाँ आ गए...तो फूफी ने ही कहा की तुम्हे इत्तिल्ला दे दू कही आपकी उनसे बात न होने पर परेशान ना हो जाओ, इसलिए...”
२ – “अरे नहीं बेटा...वो भी चले गए मुझे छोडकर..अब भला में अकेला क्या करूँगा इस मुल्क में रहकर...कोशिश करता हू की में भी जल्द ही वहाँ आ जाऊ..खेर अब तुम्हारा बिल बहुत आ गया होंगा?”
१ – “नहीं वैसा नहीं है....बाकि सारी दुनिया में फोन करने पर तो STD चार्ज लगता है पर अपने मुल्क की कॉल लोकल मानी जाती है....इसलिए ज्यादा पैसा नहीं लगता..आज कम से कम इस बात पर फक्र किया ही जा सकता है, पाकिस्तान में पैदा होने का....चलिए चाचा अब फोन रखता हू, यहाँ काफी लंबी लाइन लगी है...आप अपना ध्यान रखियेगा और कोशिश कीजिये की जल्द से जल्द यहाँ पहुँच सके...सभी आपकी प्रतीक्षा में है “
२ – “ में पूरी कोशिश करूँगा बेटा...आज से बाजारों और मस्जिदों के ज्यादा चक्कर लगाऊंगा..क्या पता मेरी किस्मत भी खुल जाए...”
